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अब देश में ही बनेंगे फाइटर जेट

MIG- 29K लड़ाकू विमान
लड़ाकू विमान (प्रतीकात्मक)

नई दिल्ली। यूं तो अपनी सैन्य जरूरत का बड़ा हिस्सा भारत अभी भी विदेशों से आयात करता है पर केंद्र सरकार अगले महीने रक्षा विनिर्माण पर अपनी रक्षा नीति पेश करने जा रही है। इसका मकसद रक्षा उत्पादन उद्योग को बढ़ावा देना और देश में लड़ाकू विमान, मिसाइलों आदि का निर्माण करना है।





केंद्र सरकार की योजना है कि भारत अगले 10 वर्षों में सैन्य उपकरणों के शीर्ष 05 निर्माताओं में शामिल हो। सूत्र बताते हैं कि इस नीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके बाद इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। रक्षा उत्पादन नीति (DPP- 2018) का फोकस लड़ाकू विमानों, लड़ाकू हेलिकॉप्टरों और स्वदेशी हथियारों समेत अत्याधुनिक सैन्य प्लेटफॉर्मों के निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी विकसित करने की खातिर प्राप्त संसाधनों में निवेश पर होगा।

सूत्रों के मुताबिक ‘DPP- 2018’ के अगले महीने जारी किए जाने की संभावना है। नीति के मसौदे के मुताबिक सरकार वर्ष 2015 तक सैन्य वस्तुओं और सेवाओं में 1,70,000 करोड़ों रुपये के कारोबार को हासिल करने के बारे में सोच रही है। गौरतलब है कि स्वीडन के एक थींक टैंक ने मार्च महीने में अपनी रिपोर्ट में कहा खा कि पिछले 05 साल में भारत दुनिया में सैन्य हार्डवेयर का सबसे बड़ा आयातक रहा है।

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