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जयंती विशेषः अपना ब्रीफकेस खुद लेकर चलता था यह महान वैज्ञानिक, जानें 9 खास बातें

अक्टूबर 1965 का एक दिन। आकाशवाणी (आल इंडिया रेडियो) के एक प्रसारण में प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने कहा यदि मुझे मौका मिले तो सिर्फ 18 महीने में परमाणु बम बना सकता हूं। मुश्किल से तीन महीने ही हुए थे कि 24 जनवरी 1966 को एक विमान हादसे में डॉ. भाभा का निधन हो गया। भाभा के निधन को क्या माना जाए-महज संयोग या साजिश? क्या दुनिया की कुछ ताकतें नहीं चाहतीं थी कि भारत परमाणु बम बनाने की क्षमता हासिल कर पाए? ऐसे ढेरों सवाल हैं जिनका जवाब आज तक नहीं मिल पाया। यह तो तय है कि डॉ. भाभा का अचानक निधन न हुआ होता तो विज्ञान के क्षेत्र में भारत की तस्वीर कुछ और ही होती। मंगलवार (30 अक्टूबर) को डॉ. भाभा की जयंती के अवसर पर हम आपको बता रहे हैं डॉ. भाभा के बहुआयामी व्यक्तित्व के बारे में-





भारत के ‘लियोनार्दो दा विंची’

वर्ष 1909 में 30 अक्टूबर को मुंबई में जन्मे डॉ. भाभा बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वे वैज्ञानिक थे, गणितज्ञ थे, इंजीनियर थे और कलाकार भी थे। संगीत की उन्हें गहरी समझ थी। एक साथ इतने गुणों को देखकर ही महान वैज्ञानिक सर सीवी रमण उन्हें भारत का लियोनार्दो दा विंची कहते थे।

फोटो साभारः गूगल

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