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नौसेना कमांडरों के सम्मेलन में नई तकनीक पर चर्चा

नौसेना कमांडरों का सम्मेलन

नई दिल्ली। नौसेना के कमांडरों का इस साल का दूसरा छमाही सम्मेलन यहां बुधवार को शुरू हुआ जिसमें नौसेना के आला कमांडर नई और भविष्य की तकनीक को अपनी शस्त्र प्रणालियों में इस्तेमाल के बारे में गहन चर्चा करेंगे। इस सम्मेलन में नौसेना के मानव और शस्त्र-संसाधनों के सक्षम इस्तेमाल के उपायों पर भी विचार किया जाएगा।





नई उभरती तकनीक में बिग डेटा एनालिसिस औऱ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसे भविष्य की तकनीक पर चर्चा शामिल होगी। इससे नौसेना की सक्षमता और प्रभाविता में सुधार करने में मदद मिलेगी। शुक्रवार तक चलने वाले इस छमाही सम्मेलन को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी सम्बोधित करेंगी।

सम्मेलन के दौरान नौसेना की विभिन्न इकाइयों की समाघात तैयारी के बारे में भी विचार किया जाएगा।  हिंद महासागर में भारतीय नौसेना के समक्ष पेश होने वाली विभिन्न चुनौतियों से निबटने के लिये नौसेना को हमेशा तत्पर रखने के इरादे से यह सम्मेलन काफी अहम होगा। नौसेना के समक्ष कई नये  दायित्व औऱ चुनौतियां पेश हो रही हैं जिन पर भी सम्मेलन के दौरान आला कमांडर अपने विचार रखेंगे।

भारतीय समुद्री इलाके की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं और बढ़ती चुनौतियों की बढती सूची पर भी सम्मेलन के दौरान चर्चा होगी। इन सब के लिये सम्मेलन के दौरान नौसेना के विशेषज्ञों का ब्रेनस्टार्मिंग सेशन भी आयोजित होगा। इसमें नये विचारों और रणनीतियों पर चर्चा होगी।

सम्मेलन के दौरान नौसेना के संगठनात्मक ढांचे की भी समीक्षा की जा रही है। इस दौरान समुद्री सुरक्षा की उभरती चुनौतियों और खतरों की पहचान की जाएगी। भारत एक समुद्री देश है और इसका विकास समुद्र से काफी हद तक जु़ड़ा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अवधारणा– सागर ( सेक्युरिटी एंड ग्रोथ फार आल इन द रीजन) के तहत भारतीय नौसेना की यह जिम्मेदारी है कि वह हिंद महासागर के इलाके में सुरक्षा और स्थायित्व को सुनिश्चित करने के लिये हमेशा तैयार रहे। इस इलाके की अग्रणी नौसेना होने के अनुरूप समान विचार वाले देशों के साथ मिलकर नेट सिक्युरिटी प्रोवाइडर की भूमिका निभानी है।

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