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सेनाओं में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने पर विचार

महिला ऑफिसर्स

नई दिल्ली। सेनाओं में महिलाओं की स्थायी भर्ती को लेकर सरकार खुले मन से विचार कर रही है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने यहां फिक्की लेडीज आर्गेनाइजेशन की एक बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि तीनों सेनाओं की इस बारे में अपनी कठिनाइयां हैं जिन्हें दूर करने के लिये हम एक समान नीति बनाने पर काम कर रहे हैं। हमारी योजना है कि शार्ट सर्विस कमीशन की महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जाए।
रक्षा मंत्री ने कहा कि वायुसेना ने तो अपने यहां सबसे ऊंची किस्म का दायित्व महिला अधिकारियों को सौंपा है। यह दायित्व लड़ाकू पायलट का है लेकिन थलसेना और नौसेना की अपनी दिक्कतें हैं। थलसेना में मेडिकल वजहों से उन्हें लड़ाकू भूमिका में नहीं लगाया जा सकता जबकि नौसेना के युद्धपोतों पर उन्हें तैनात करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि स्थायी कमीशन हासिल करने के अधिकार को लेकर कई महिला अफसरों ने कोर्ट के दरवाजे भी खटखटाएं हैं।
रक्षा मंत्री ने महिला उद्योगपतियों के संगठन एफएलओ की सदस्यों से कहा कि बिना वर्दी पहने भी महिलाओं को सेनाओं की सेवा में लगाया जा सकता है। सेना की जरूरत की कई चीजें महिला उद्यमी बना सकती हैं।
उल्लेखनीय है कि पहली बार 1992 में भारतीय सेना में गैर मेंडिकल भूमिका में महिला अधिकारियों की भर्ती शुरू की थी। तब से महिलाओं को शिक्षा, विधि आदि विभागों में भर्ती किया जाने लगा लेकिन अब तक उन्हें आर्मर्ड कोर, इनफैन्ट्री औऱ मेकेनाइज्ड इनफैन्ट्री आदि लड़ाकू यूनिटों में सेवा देने का मौका नहीं दिया गया है। दूसरी ओर वायुसेना में पिछले साल ही महिला अफसरों को लड़ाकू पायलट बनने को मौका मिला और वे लड़ाकू भूमिका में तैनात की जा सकती हैं। वायुसेना में महिला अफसरों को पहले से ही परिवहन विमान और हेलीकाप्टर आदि पर तैनात किया जाने लगा है। जहां तक युद्धपोतों का सवाल है वहां महिलाओं के लिये अलग से केबिन और वाशरूम आदि नहीं बने होते हैं इसलिये देश में बनने वाले भविष्य के युद्धपोतों का डिजाइन इस तरह किया जा रहा कि उनमें महिलाओं के लिये अलग केबिन हो।
अब तक बहुत कम देशों जैसे इजराइल, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा, ब्रिटेन, डेनमार्क, स्वीडन, नार्वे, फिनलैंड आदि देशों ने लड़ाकू भूमिका में महिलाओं को तैनात किया है। भारत में भी महिलाओं को लड़ाकू भूमिका में भेजने की बढ़ती मांग के मद्देनजर भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने पिछले साल वादा किया था कि महिलाओं को लड़ाकू यूनिटों में भर्ती करने के मसले पर विचार चल रहा है औऱ इसके पहले कदम के तौर पर महिलाओं को मिलिट्री पुलिस में भर्ती करने का फैसला लिया गया है।





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