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जयंती विशेष : जीते जी अंग्रेजों के हाथ नहीं आए थे चंद्रशेखर आजाद, इस महान क्रांतिकारी से जुड़ी 11 ख़ास बातें

आज महान क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद का जन्मदिन है। आज ही के दिन यानी 23 जुलाई, 1906 में मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव भाभरा में उनका जन्म हुआ था। बड़े होकर उन्होंने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया। सिर्फ 14 की उम्र में उन्होंने ‘भारत माता की जय’ बोलते हुए पंद्रह बेंत की सजा खाई थी। 1928 में भगत सिंह के साथ उन्होंने अंग्रेज अधिकारी सैंडर्स की हत्या कर लाला राजपत राय की मौत का बदला लिया था। केवल 17 वर्ष की उम्र में चंद्रशेखर आज़ाद क्रांतिकारी दल में शामिल हो गए। ऐसे महान क्रांतिकारी से जुड़ी कुछ ख़ास बातें आज हम आपको बता रहे हैं।





संस्कृत का विद्वान बनाना चाहती थी मां

23 जुलाई, 1906 को मध्यप्रदेश के भाभरा गांव में सीताराम तिवारी और जगरानी देवी के घर एक बालक ने जन्म लिया। इस बालका का नाम रखा गया चंद्रशेखर सीताराम तिवारी। इनका जन्म करवाने वाली दाईं मुस्लिम थी। उन्हें सभी मुन्ना कहकर बुलाते थे। चंद्रशेखर की मां चाहती थीं कि बेटा संस्कृत में विद्वान् बने। उन्होंने मुन्ना के पिता को राज़ी कर लिया था कि उसे पढ़ने के लिए बनारस के काशी विद्यापीठ में भेज दें। आजाद का प्रारम्भिक जीवन आदिवासी इलाके में बीता इसलिए बचपन में आजाद ने भील बालकों के साथ खूब धनुष-बाण चलाए। उन्होंने निशानेबाजी की कला बचपन में ही सीख ली थी।

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