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भारत के वीरः गुल्लक तोड़कर शहीदों के परिजनों की मदद कर रहे हैं बच्चे

गुल्लक तोड़कर भारत के वीरों की मदद

नई दिल्ली। शहीद जवानों के परिजनों की देखरेख के लिए गृह मंत्रालय की पहल ‘भारत के वीर’ सार्थक हो रही है। ‘भारत के वीर’ पोर्टल पर अब तक 30 करोड़ रुपये का डोनेशन मिल चुका है। एक लाख से अधिक लोग इस अभियान में अपना योगदान दे चुके हैं। योगदान देने वालों में फिल्म सितारों, सरकारी अधिकारियों और पेंशनधारियों से लेकर स्कूल में पढ़ने वाले छोटे बच्चे तक हैं। बहुत से मददगार ऐसे हैं जो गुमनाम रहकर अपना योगदान दे रहे हैं।





बच्चों में कुछ ऐसे भी हैं जो अपनी गुल्लक तोड़कर शहीद जवानों के परिजनों की मदद कर रहे हैं। ऐसे ही दो बच्चे हैं अवनी डालमिया (13 वर्ष) और प्रियंग डालमिया (10 वर्ष)। अवनी डालमिया क्लास 9 में पढ़ती है और उसका छोटा भाई प्रियंग डालमिया में पांचवी क्लास का छात्र है। इन दोनों ने अपनी गुल्लक में जो कुछ जमा था वह शहीद जवानों के परिजनों के लिए दे दिया। दोनों बच्चों ने शहीदों के परिजनों के लिए एक-एक लाख रुपये दिये हैं।

दो दिन पहले दोनों बच्चे गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी मिले। अवनी डालमिया पिछले वर्ष अपने परिवार के साथ जैसलमेर गई थी। वहां उन्हें जवानों के काम के बारे में पता चला। और यह भी पता चला कि जो जवान शहीद हो जाता है तो उसके परिजनों का जीवन कितना कठिन हो जाता है। अवनी औऱ उसके भाई ने तय किया कि उनके माता-पिता ने उनके लिए जो भी पैसा जमा किया है वह शहीदों के परिजनों के लिए दे देंगे।

शहीदों के परिजनों की सहायता के लिए अपनी बचत दान करने वाले अवनी और प्रियंग जैसे ढेरों बच्चे हैं। छत्तीसगढ़ के 15 वर्ष के सुकुमार ने भारत के वीर पोर्टल पर 5 हजार रुपये दिए। सिर्फ बच्चे ही अब तक इस पोर्टल पर लाखों रुपये की मदद दे चुके हैं।

नौकरी करने वाले ढेरों लोग इस पोर्टल पर नियमित रूप से दान दे रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश के अवधेश कुमार अपनी पेंशन का एक हिस्सा पिछले छह महीने से इस पोर्टल पर दे रहे हैं। बच्चे, बूढ़े, एनआरआई सभी डोनेशन दे रहे हैं। इस पहल से जुड़ने वालों में शहरों के साथ-साथ गांवों के लोग भी हैं।

इस पहल में योगदान देने वालों में फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार भी हैं। बता दें कि भारत के वीर पोर्टल पर शहीद और उनके परिवार के बारे में जानकारी दी जाती है। जब शहीद के परिवार को 15 लाख रुपये की मदद मिल जाती है तो उस परिवार का नाम हटा दिया जाता है। अब तक 159 शहीदों के परिवार को मदद दी जा चुकी है।

 

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