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रिटायर्ड सैन्य अफसरों से वापस लिए जाएंगे सहायक

जवान

नई दिल्ली। सेना प्रमुख बिपिन रावत से की गई शिकायत के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आसपास रहने वाले सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों से सहायकों को वापस लेने का कदम उठाया गया है। शिकायत में कहा गया था कि इससे जनशक्ति का दुरुपयोग हो रहा है औऱ आखिर उन्हें किस तरह से अनधिकृत तरीके से नियोजित किया जा रहा था।





इस मुद्दे को सेना प्रमुख के ध्यान में लाए जाने के बाद यह पाया गया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र-नोएडा, गुड़गांव, ग्रेटर नोएडा तथा उसके आसपास सेवा निवृत्त सैन्य अधिकारियों को तकरीबन एक हजार कर्मचारी (पैदल सैनिक की एक बटालियन के बराबर) सहायक के रूप में मुहैया कराए गए थे जबकि देश के अन्य हिस्सों में रह रहे सेवा निवृत्त अधिकारियों को इतनी ही संख्या में सहायक उपलब्ध कराए जा रहे थे।

सेना के सूत्रों के मुताबिक अब इन सहायकों को रिटायर्ड अफसरों के घरों से वापस लिया जा रहा है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस मामले में कोई दुरुपयोग न होने पाए। सहायकों की यह प्रणाली औपनिवेशिक काल से है। ब्रिटिश काल में इनका उपयोग लड़ाकू सैन्य अधिकारियों तथा जूनियर कमीशन अधिकारियों की वर्दी को सुसज्जित रखने के लिए किया जाता था। हालांकि तब भी उनके दुरुपयोग की कई शिकायतें आईं थीं। अभी भी शिकायत आ रही थी कि ये अधिकारी अपने व्यक्तिगत काम करवाते हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा है कि किसी भी फौजी से अर्दली का काम नहीं करवाया जायेगा।

 

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