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थलसेना के कमांडरों का सम्मेलन शुरू, चीन और पाक सीमा पर हालात की चर्चा

नई दिल्ली। थलसेना के आला कमांडरों का छह दिनों का छमाही सम्मेलन यहां सोमवार को शुरु हुआ जिसमें चीन और पाकिस्तान से लगी सीमा पर मौजूदा सैन्य स्थिति पर चर्चा की गई।





इस दौरान सेना के जवानों के लिये अरमान नाम का एक ऐप भी जारी किया गया जिसके जरिये सेना के जवान अपनी बातों को लेकर सैन्य मुख्यालय से सीधा सम्पर्क् स्थापित कर सकते हैं। इसके जरिये जवानों को जरूरी सूचनाएं और उनके बारे में लिये गए फैसलों की जानकारी भी मिलेगी।

इस सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सैन्य तैयारियों पर चर्चा की और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल से युद्ध रणनीति और कार्रवाई पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि थलसेना की युद्धक्षमता बेहतर करने को प्राथमिकता दी जा रही है। कमांडरों के सम्मेलन को रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने सम्बोधित करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा चुनौतियों से निबटने में भारतीय थलसेना की केन्द्रीय भूमिका है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम का रोजाना उल्लंघन का जिक्र किया और कहा कि इस्लामाबाद भारत के खिलाफ भाड़े का युद्ध लड़ रहा है।

उन्होंने चीन से लगने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा के मौजूदा हालात का जिक्र करते हुए कहा कि वहां  सीमाओं का अतिक्रमण रोकने के लिये सेना को हमेशा चौकस रहने की जरुरत है। भामरे ने कहा कि सेनाओं का आधुनिकीकरण और सीमा पर ढांचागत विकास को सरकार प्राथमिकता से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने सेनाओं को देश में बने रक्षा साज सामान के मामले में आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया और कहा कि तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण की प्रक्रिया को तेज करने की जरुरत है।

सैन्य कमांडर सम्मेलन शुरु होने के पहले थलसेना के प्रमुख जनरल रावत ने वाइस चीफ और कमांडरों के साथ अलग से एक बैठक की। बाद में सम्मेलन में रक्षा बजट में सेना के लिये किए गए वित्तीय प्रावधानों का आकलन किया।

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