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अमेरिकी कैटसा कानून का असरः रूस से एस-400 मिसाइल सौदे पर आंच ?

एस- 400 मिसाइल प्रणाली

नई दिल्ली। रूस पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाने वाला नया कानून कैटसा ( काउंटरिंग अमेरिकन एडवर्सरीज  थ्रू सैंक्शंस एक्ट) की आंच भारत और रूस के बीच एस-400 एंटी मिसाइल जैसे भावी रक्षा सौदों पर पड़ सकती है। इसे लेकर भारतीय सामरिक हलकों में तो चिंता है ही अमेरिकी सामरिक जगत में भी चिंता है क्योंकि अमेरिका भारत को चीन के मुकाबले खड़ा करना चाहता है।





भारतीय सेनाएं 70 प्रतिशत से अधिक रूस पर निर्भर हैं इसलिए कैटसा का यदि आदर किया जाए तो भारत की सैन्य क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। भारत और अमेरिका के बीच गहराते सामरिक और रक्षा रिश्तों के मद्देनजर भारत के लिये दुविधा की स्थिति पैदा होगी। राजनयिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन के कुछ हलकों में कहा जा रहा है कि कैटसा के सख्ती से लागू होने से भारत पर इसकी आंच पडेगी जो अमेरिका के दीर्घकालीन हितों के लिये भी ठीक नहीं है। पेंटागन के एक आला अधिकारी जो फाल्टर के मुताबिक कैटसा कानून का इरादा रूस को चोट पहुंचाना है न कि भारत को।

अमेरिका के दुश्मनों का मुकाबला करने के लिये प्रतिबंध कानून यानी कैटसा के भारत पर पड़ने वाले संभावित असर के बीच इस आशय की रिपोर्टें हैं कि भारत ने रूस के साथ पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान (एफजीएफए) के साझा विकास और उत्पादन का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम बीच में ही रोक दिया है और रूस से कहा है कि रूस खुद इसका विकास करे और बाद में भारतीय वायुसेना के लिये इसे खरीदा जा सकता है। इन्हीं रिपोर्टों के बीच इस आशय़ की भी अटकलें हैं कि रूस से एस-400 एंटी मिसाइल का भी सौदा रद्द हो सकता है। हालांकि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के पिछले महीने रूस दौरे में एस-400 मिसाइल के सौदे पर प्रगति होने का दावा रूसी अधिकारियों ने किया है। रिपोर्टें है कि आगामी अक्टूबर महीने में  भारत और रूस के बीच होने वाली शिखर बैठक के दौरान एस-400 एंटी मिसाइल प्रणाली पर सौदा सम्पन्न हो जाएगा। सूत्रों के मुताबिक इस सौदे के लगभग सभी पहलुओं पर सहमति हो चुकी है केवल कीमत को लेकर गहन सौदबाजी चल रही है जिस पर शिखर बैठक के दौरान अंतिम सहमति हो जाएगी।

लेकिन इस बीच अमेरिकी प्रशासन द्वारा कैटसा कानून लाने के बाद इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि रूस के साथ रक्षा सहयोग करने वाले देशों को इसके दायरे में लाया जाए। जो देश कैटसा कानून को नजरअंदाज करेंगे अमेरिका उन पर प्रतिबंध लगा सकता है। सूत्रों के मुताबिक ताजा विश्व माहौल में भारत के लिये अमेरिका के साथ भी सामरिक संतुलन बना कर चलने की जरूरत है इसलिये कैटसा को भारत पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकता।

हालांकि विगत में भारत ने रूस पर लगने वाले अमेरिकी प्रतिंबंधों की परवाह नहीं की है लेकिन अब पिछले कुछ दशकों में अमेरिका के साथ भारत का रक्षा सहयोग काफी गहरा हुआ है जिसके मद्देनजर यह माना जा रहा है कि अमेरिका भी भारत पर दबाव डालने की स्थिति में है। अमेरिकी प्रशासन का एक वर्ग इस बात पर आमादा है कि रूस के साथ रक्षा सहयोग करने वाले देशों पर कैटसा सख्ती से लागू किया जाए।

दुश्मन की हमलावर मिसाइलों को नष्ट करने वाली रूसी एस-400 एंटी मिसाइल काफी असरकारी मानी जाती है जिसे भारत दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में तैनात करना चाहता है ताकि चीन और पाकिस्तान की परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलों से इन शहरों की रक्षा की जा सके। करीब आठ अरब डालर वाला एस-400 एंटी- मिसाइल का सौदा करने पर सहमति दो साल पहले गोवा में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच हुई थी।

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