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अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार में भारत को NATO देशों के बराबर का दर्जा दिया

पीएम मोदी और ट्रंप

वाशिंगटन। अमेरिका ने सोमवार को द्विपक्षीय व्यापार में भारत को NATO (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के सदस्य देशों के बराबर दर्जा दिया है। इस दर्जे का मतलब यह है कि NATO के सदस्य देशों की तरह ही भारत के साथ कारोबारी रिश्तों को वरीयता दी जाएगी। NATO उत्तरी अमेरिका व यूरोपीय देशों का संगठन है जिनके बीच रक्षा सहयोग का समझौता है।





यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल के मुताबिक स्ट्रैटेजिक ट्रेड ऑथोराइजेशन का दर्जा मिलने से भारत के साथ कारोबार करने के लिए वहां के निर्यातकों को अब कम लाइसेंस लेने की जरूरत होगी।

अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक अमेरिका के इस फैसले से भारत को यह फायदा होगा कि उच्च तकनीकी वाले अमेरिकी रक्षा उपकरण और हथियार अब आसानी से मिल पाएंगे। कई गैर रक्षा उत्पाद जिनके निर्यात पर वहां सख्त नियंत्रण है और जिन्हें सिर्फ कड़ी लाइसेंसिंग प्रक्रिया के तहत निर्यात किया जाता है वे भी अब सहज रूप से हासिल हो पाएंगे। दरअसल अमेरिका ने जिन देशों को STA-1 (पहले स्तर का स्टैटेजिक ट्रेड ऑथोराइजेशन) का दर्जा दे रखा है उन्हें इस नियंत्रण और लाइसेंसिग प्रक्रिया से छुट मिल जाती है। यह दर्जा मिलने के बाद भारत को भी इस छूट को पाने का अधिकार मिल गया है।

इंडो पैसिफिक (भारत-प्रशांत क्षेत्र) बिजनेस फोरम की बैठक में अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने भारत को STA-1 दर्जे की पुष्टि की। विल्बर रॉस के मुताबिक इस दर्जे के न होने से अमेरिका बीते वर्ष 9.7 अरब डॉलर के रक्षा और गैर रक्षा उत्पाद निर्यात नहीं कर सका जो भारत के लिए भी इतने ही अहम थे। अब यह दर्जा मिलने के बाद स्थिति में बदलाव आएगा।

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