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भारत के विकास में सहयोग के लिये अमेरिकी एजेंसी के साथ समझौता

भारत-अमेरिका का फ्लैग

नई दिल्ली। भारत की विकास जरूरतों को पूरा करने में सहयोग देने के इरादे से अमेरिकी सहायता एजेंसी (यूएसएड) औऱ भारत में अमेरिकी चैम्बर आफ कामर्स (एमचैम) के बीच सहयोग के एक समझौते पर यहां हस्ताक्षर हुए। इस समझौते से अमेरिकी सरकार औऱ अमेरिकी प्राइवेट सेक्टर के बीच साझेदारी को मजबूत किया जा सकेगा।





यह ऐलान उस दिन हुआ है जब वाशिगंटन में हिंद प्रशांत बिजनेस फोरम की उच्चस्तरीय बैठक शुरु हुई है। इस बैठक में अमेरिकी प्रशासन के प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों के अलावा बिजनेस औऱ सरकार से वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी होगी। इस बैठक में इस बात पर चर्चा होगी कि हिंद प्रशांत इलाके की सम्भावनाओं का दोहन करने के लिये प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को किस तरह बढ़ावा दिया जाए। यूएस एड औऱ एमचैम ने कहा है कि दोनों मिलकर मातृ स्वास्थ्य, टीबी, एड्स, ऊर्जा पर्यावरण, जल व सफाई, लिंग और महिला सशक्तिकरण और युवाओं से सम्बन्धित मसलों पर सहयोग का आधार बढाएंगे।

यूएस मिशन के निदेशक मार्क एंथोनी ह्वाइट ने इस साझेदारी के बारे में कहा कि इस सहमति के ज्ञापन से पता चलता है कि भारत की विकास जरुरतों को पूरा करने के लिये दोनों संस्थाएं सहयोग को तैयार हैं। सहमति का ज्ञापन दोनों के बीच सहयोगपूर्ण रिश्ता का प्रतीक है। एमचैम की महानिदेशक रंजना खन्ना ने कहा कि भारत में कारपोरेट सोसल जिम्मेदारी में अमेरिकी कम्पनियां सबसे बड़ी भूमिका निभा रही हैं। यूएसएड जैसी एजेंसियों के साथ हम सार्वजनिक प्राइवेट साझेदारी के नये दौर में प्रवेश कर रहे हैं ताकि सतत विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

 

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