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दुनिया का पहला मिसाइल मैन जिसने अंग्रेजों पर बरसाए रॉकेट, जानें 9 खास बातें

मिसाइल आज भले ही पश्चिम की देन मानी जाती है लेकिन इसे विकसित करने की प्रेरणा पश्चिम को भारत से मिली। जी, हां हम बात कर रहे हैं टीपू सुल्तान के रॉकेटों की जिनसे अंग्रेज भी थर-थर कांपते थे। हालांकि रॉकेटों का पहली बार इस्तेमाल हैदर अली (टीपू सुल्तान के पिता) ने किया था लेकिन उसे सही मायनों में मारक बनाने का काम टीपू सुल्तान ने किया। रॉकेटों का व्यापक रूप से इस्तेमाल टीपू सुल्तान ने ही किया। इसीलिए बहुत से लोग टीपू को दुनिया का पहला मिसाइलमैन कहते हैं। रॉकेटों की मारक क्षमता और उसके डिजाइन से हैरान-परेशान अंग्रेज कुछ रॉकेट इंग्लैंड ले गए। टीपू के उन्हीं रॉकेटों ने दुनिया को मिसाइल बनाने का रास्ता दिखाया है। आज हम आपको बता रहे है टीपू सुल्तान के जीवन और उनके रॉकेटों से जुड़ी कुछ खास बातेः





मैसूर का शेर

TIPU SULTAN

20 नवंबर 1750 को हैदर अली के घर जन्मे टीपू सुल्तान का पूरा नाम सुल्तान फतेह अली खान शाहाब था। उस वक्त हैदर अली मैसूर के राजा के सेनापति थे लेकिन बाद में वह शासक बन गए। कम उम्र (महज 15 बरस) में ही युद्ध में भाग लेने की वजह से टीपू को मैसूर का शेर कहा जाने लगा।

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