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सियाचिन में दस वर्ष में शहीद हुए 163 जवान

भारतीय सेना के जवान
सियाचिन में ड्यूटी के दौरान जवान (फाइल)

नई दिल्ली। दुनिया के सबसे ऊंचे और कठिन युद्धक्षेत्र सियाचिन में गत दस वर्षों में भारत ने अपने 163 जवान गंवाए हैं। यह जानकारी बुधवार को लोकसभा में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी। देश की रक्षा के लिए अपना बलिदान देने वालों में छह अधिकारी भी हैं।





लगभग 20 हजार फुट की ऊंचाई पर सियाचिन इलाके में जवानों को दुश्मन के साथ-साथ कठिन हालातों का भी सामना करना पड़ता है। वर्ष के लगभग बारहों महीनों जवानों को प्रतिकुल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। जब-तब उठने वाले बर्फीले तूफानों से जान पर बन आती है। हिमस्खलन और जमीन धंसने की घटाएं जब-तब होती रहती हैं। कई बार जवान भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। सर्दी के दिनों में सियाचिन में तापमान शून्य से 60 डिग्री तक नीचे चला जाता है। ऑक्सीजन की कमी और तेज हवाओं का भी सामना जवानों को करना पड़ता है। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस इलाके में भारत और पाकिस्तान ने वर्ष 1984 में यहां पहली बार अपने सैनिक तैनात किए थे। कुछ समय बाद दोनों देशों के बीच सर्दियों में अत्यंत ऊंचाई वाली चौकियों से सैनिक हटाने की सहमति बनी लेकिन करगिल की घटना के बाद अब बारहों महीनों सियाचिन में सैनिकों की तैनाती रहती है।

 

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