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कर्नल पुरोहित की न्यायिक हिरासत जरूरी नहीं : NIA

मालेगाँव ब्लास्ट

नई दिल्ली। 2008 में मालेगांव ब्लास्ट मामले में एनआईए (NIA) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अब कर्नल पुरोहित को न्यायिक हिरासत में लेने की जरूरत नहीं है। एनआईए ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट से दिशानिर्देश देने की मांग की। एनआईए पहले ही पुरोहित के खिलाफ मकोका का आरोप हटा चुकी है।





जस्टिस आरके अग्रवाल और जस्टिस अभय मनोहर सप्रे से एनआईए ने कहा कि इस मामले में आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं और आरोप तय करने पर जिरह चल रही है। ऐसे समय में वह कर्नल पुरोहित को हिरासत में रखने पर जोर नहीं देना चाहती है।

पुरोहित ने अपनी न्यायिक हिरासत को अवैध बताते हुए कहा है कि एनआईए छह साल से इस केस में चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई। ऐसे मे उन्हें हिरासत में रखना अवैध तो है ही, उसके अधिकारों का हनन भी है।

पुरोहित ने अपनी याचिका में कहा है कि 2011 में केंद्र ने मालेगांव मामले की जांच एटीएस से लेकर एनआईए को सौंपी थी लेकिन एनआईए मामले की जांच आगे नहीं बढ़ा पा रही है।

दरअसल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि इस मामले में अभी ऐसे सबूत नहीं दिख रहे हैं जिससे मकोका साबित होता हो। ऐसे में निचली अदालत मकोका प्रावधान के बिना जमानत याचिका पर सुनवाई करे। मालेगांव धमाके में पुरोहित के अलावा साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और नौ अन्य आरोपी हैं। पुरोहित पर आरोप है कि उन्होंने सेना का 60 किलो आरडीएक्स चुराया और धमाकों में भूमिका निभाई। वह अभिनव भारत संगठन के लिए साजिश में शामिल हुए। मालेगांव धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई थी जबकि सौ जख्मी हुए थे।

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