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NIA कोर्ट : विकास का पैसा आतंकियों को पहुंचा, 14 दोषी

एनआईए

गुवाहाटी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने सोमवार को नार्थ कछार हिल्स (एनसी हिल्स) के 1000 करोड़ रुपये के घोटाले मामले में दर्ज किए गए पहले दो केस में पूर्व आतंकियों, चुने हुए प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारियों समेत कुल 14 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस घोटाले में असम के आतंकवादी गुट डिमा हालिम डाउगा (डीएचडी) के ज्वेल (जे) गुट का प्रमुख ज्वेल गार्लोसा भी शामिल है। ये पैसा असम में आतंकवादियों को विदेशों से हथियार खरीदने के लिए पहुंचाया गया था। पहले मामले में विशेष जज राबिन फूकन ने 13 और दूसरे मामले में 2 अभियुक्तों को दोषी करार दिया। एक अभियुक्त की मौत सुनवाई के दौरान हो गई थी। सजा का ऐलान मंगलवार को किया जाएगा।





ज्वेल गार्लोसा

असम के आतंकवादी गुट डिमा हालिम डाउगा (डीएचडी) के ज्वेल (जे) गुट का प्रमुख ज्वेल गार्लोसा (फाइल फोटो)

उल्लेखनीय है कि एनसी हिल्स के 1000 करोड़ रुपये का वर्ष 2009 में घोटाला सामने आया था। पूरे राज्य ही नहीं देश भर में यह मुद्दा सुर्खियां बना। देश में कई आतंकी हमलों के बाद गठित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को जांच के लिए पहला मामला एनसी हिल्स घोटाला ही सौंपा गया था। इस मामले में एनआईए ने वर्ष 2009 में चार्जशीट दाखिल की। जिसमें आतंकी संगठन डीएचडी (जे) के प्रमुख ज्वेल गार्लोसा, डीएचडी (जे) कमांडर-इन-चीफ निरंजन होजाई, एनसी हिल्स एटोनोमस काउंसिल के मुख्य कार्यकारी सदस्य मोहित होजाई, मालसावमकिमी, फोजेंद्र होजाई, बाबुल केमफ्राई, समाज कल्याण अधिकारी आरएच खान, आशरिंगदाउ वारिसा, समीर अहमद, वानलालचाना, जार्ज लाउमथांग, जयंत कुमार घोष, देबाशीष भट्टाचार्य, संदीप घोष शामिल हैं।

एनआईए ने जांच में बड़ी मात्रा में सरकार की विकास निधियों को आतंकी संगठन डीएचडी (जे) को भारत के खिलाफ युद्ध करने के लिए गोला-बारूद खरीदने के लिए देने का आरोप लगाया है।

एनआईए ने अपनी चार्जशीट में खुलासा किया है कि 2008 में साजिश के तहत आरोपी मोहित होजाई ने एनसी हिल्स आटोनोमस काउंसिल (एनसीएचएसी) का प्रभार संभाला था। उसके बाद उसने स्कूल के बच्चों, शारीरिक रूप से बाधाग्रस्त और अन्य सरकारी परियोजनाओं के कल्याण के लिए जारी की गई सरकारी निधियों का गबन करना शुरू कर दिया था।

जांच में पाया गया कि अकेले 2009 में समाज कल्याण विभाग के लिए कम से कम 13 करोड़ रुपये जारी किए गए। जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए 3 करोड़ रुपये। ये रुपये नेपाल में बैठे जीएचडी (जे) के कैडरों को पहुंचा दिए गए। ज्ञात हो कि एनआईए की विशेष कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 16 मई को पूरी की थी। फैसला को सुरक्षित रख लिया था।

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