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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जाकिर नाईक को NIA ने भेजा नोटिस

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कई टीवी चैनलों के मालिक और संस्थाएं चलाने वाले विवादास्पद डॉक्टर जाकिर नाईक को 14 मार्च को पूछताछ के लिए मुख्यालय में तलब किया है। डॉक्टर नाईक के खिलाफ एनआईए ने विदेशों से धन लेने के सिलसिले में मामला दर्ज किया था।





एजेंसी ने डॉक्टर नाईक को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजा है। यह नोटिस उनके भाई डॉक्टर मोहम्मद अब्दुल करीम ने लिया। एजेंसी के मुताबिक, डॉक्टर जाकिर नाईक को RC-O5/2016/NlA-MUM के सिलसिले में नोटिस भेजा गया है। इससे पहले ईडी ने आज सुबह ज़ाकिर की बहन नाइला नूरानी से भी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में पूछताछ की थी।

ज़ाकिर नाइक इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के फाउंडिंग मेंबर हैं और पीस टीवी जैसे 17 देशों में प्रसारित होने वाले 5 और चैनलों के बोर्ड मेंबर हैं। मनी लॉन्ड्रिंग कानून (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत नाईक का बयान दर्ज कराया गया है। ईडी ने पिछले साल दिसंबर में नाईक और उनके कई कथित करीबियों के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया था। एजेंसी ने यह मामला गैर कानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम के तहत एनआईए की शिकायत का संज्ञान लेने के बाद दर्ज किया था।

क्या है मामला

ईडी ने ज़ाकिर की संस्था के अकाउंट की छानबीन के दौरान 200 करोड़ रुपए के हेर-फेर का शक ज़ाहिर किया है। इसमें से 50 करोड़ ज़ाकिर की बहन नाइला के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया गया था। इसके अलावा इस रकम का बाकी हिस्सा भी ऐसी 5 कंपनियों के अकाउंट में ट्रांसफर किया गया था जिसके डायरेक्टर्स में ज़ाकिर, ज़ाकिर की पत्नी फरहत ज़ाकिर नाइक और बहन नाइला शामिल हैं।

ईडी और एनआईए फ़िलहाल नाईक और उनकी संस्था से जुड़े 25 बैंक अकाउंट्स की जांच कर रही हैं। एजेंसी ने हाल में इस मामले में नाईक के करीबी सहयोगी आमिर गजदार को गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने इससे पहले नाइक के खिलाफ आतंकरोधी कानूनों के तहत मामला दर्ज किया था। उनके खिलाफ विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच शत्रुता को प्रोत्साहन देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।

जाकिर नाईक के बारे में

जाकिर नाईक एक मुस्लिम गुरू, लेखक, वक्ता और पेशे से डॉक्टर भी हैं। वह मुंबई के रहने वाले हैं। कई इस्लामी प्रचारकों के विपरीत, इनका व्याख्यान बोलचाल की भाषा में हैं। एक सार्वजनिक वक्ता बनने से पहले जाकिर नाईक ने एक मेडिकल चिकित्सक के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने इस्लाम और तुलनात्मक धर्म पर व्याख्यानों की बुकलेट संस्करणों को भी प्रकाशित किया है। सार्वजानिक रूप से जाकिर नाईक ने इस्लाम में सांप्रदायिकता को अस्वीकार किया है, कुछ लोग इन्हें सलाफी विचारधारा के प्रचारक के रूप में मानते हैं और कुछ जाकिर नाईक को वहाबी विचारधारा के एक कट्टरपंथी इस्लामी प्रचारक के रूप में जानते हैं।

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