NIA

असीमानंद के खिलाफ सबूत नहीं जुटा पाई NIA

अजमेर-ब्लास्ट

जयपुर। अजमेर दरगाह ब्लास्ट मामले में बुधवार को एनआईए (NIA) की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने तीन लोगों को दोषी करार दिया है। इनमें से एक की मौत हो चुकी है। स्वामी असीमानंद को बरी कर दिया गया है। असीमानंद के खिलाफ एनआईए कोई सबूत नहीं जुटा पाई। इस मामले में तीन आरोपी फरार हैं। दरगाह मामले में बुधवार को फैसले की तारीख होने से अदालत में गहमा-गहमी रही। कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस सभी अभियुक्तों को लेकर सुबह 9 बजे ही अदालत पहुंच गई थी।





स्वामी-असीमानंद

स्वामी असीमानंद (फ़ाइल फोटो)

दोषी आरोपियों को सजा का फैसला 16 मार्च को

एनआईए की विशेष अदालत के न्यायाधीश दिनेशचन्द्र गुप्ता ने करीब पौने पांच बजे फैसला सुनाया। अदालत ने देवेन्द्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को बम धमाके के षड्यंत्र और बम धमाकों का दोषी ठहराया। इनमें से सुनील जोशी की मौत हो चुकी है। देवेन्द्र गुप्ता और भावेश पटेल जेल में हैं। असीमानंद समेत आरोपियों चंद्रशेखर, लोकेश शर्मा, मुकेश वासानी, हर्षद, भरतेश्वर उर्फ भरत, मेहुल को बरी किया है। दोषी आरोपियों को सजा का फैसला 16 मार्च को सुनाया जाएगा।

11 अक्टूबर 2007 को ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर के अहाते में हुआ था बम धमाका

गौरतलब है कि 11 अक्टूबर 2007 को अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर के अहाते में बम धमाका हुआ। बम धमाके के वक्त बड़ी संख्या में जायरीन मौजूद थे। धमाकों से दरगाह परिसर दहल उठा। घायल महिला और पुरुषों को पुलिस, खादिमों और जायरीनों ने अस्पताल पहुंचाया। बम धमाकों में तीन लोगों की मौत हुई तो पन्द्रह से अधिक गंभीर घायल हुए थे।

पुलिस ने तलाशी अभियान चलाया तो परिसर में एक लावारिस बैग मिला, जिसमें टाइमर डिवाइस वाला जिंदा बम था। बम निरोधक दस्ते ने जिंदा बम को वहां से हटाकर निष्क्रिय किया। पहले सीबीआई और बाद में यूपीए सरकार ने जांच एनआईए को सौंपी। एनआईए ने अभिनव भारत के असीमानंद, भावेश पटेल समेत तेरह आरोपियों की गिरफ्तारी की और इनके खिलाफ चालान पेश किया। स्वामी असीमानन्द समेत आठ जमानत पर हैं और शेष जेल में हैं। इनमें सुनील जोशी की मौत हो चुकी है।

एनआईए की ओर से पेश चालान के मुताबिक, अजमेर दरगाह बम धमाके स्थल की जांच में क्षतिग्रस्त मोबाइल व सिम मिले। वहीं थैले में मिले जिंदा बम के साथ लगे मोबाइल सिम की आईडी से आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली। ये सिम बिहार व झारखंड से जारी हुए थे। सभी सिम दूसरे व्यक्तियों के नाम से कूटरचित दस्तावेज से लिए गए। वास्तविक लोग सामान्य व मजदूर पेशे से जुड़े मिले थे। पूछताछ में एक राजनीतिक दल के नेता से भी पूछताछ की गई। पड़ताल के बाद मोबाइल सिम के तार अभिनव भारत संगठन के गिरफ्तार सदस्यों से जुड़े मिले तो उन्हें गिरफ्तार किया गया।

एनआईए ने जांच के बाद बम धमाकों के पीछे असीमानंद व उनके साथियों का हाथ माना। सभी तेरह आरोपियों को गिरफ्तार करके सीबीआई कोर्ट में अलग-अलग चालान पेश किया गया। एनआईए ने असीमानंद के अलावा भावेश पटेल, देवेन्द्र गुप्ता, चंद्रशेखर, लोकेश शर्मा, मुकेश वासानी, हर्षद, भरतेश्वर उर्फ भरत, मेहुल की गिरफ्तारी हुई। मामले की सुनवाई के दौरान 149 गवाह एनआईए ने पेश किए, जिसमें 26 गवाह पक्षद्रोही भी हो गए। 451 दस्तावेज भी कोर्ट में पेश किए गए।

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