NCRB

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB)

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इसका गठन 11 मार्च 1986 में किया गया था। यह गृह मंत्रालय के साथ संलग्‍न एक कार्यालय है। इसका मुख्यालय दिल्ली में है और इसका उद्देश्य भारत की पुलिस के आधुनिकीकरण व सूचना प्रौद्योगिकी में सशक्‍त करना है। यह भारतीय दंड संहिता 1860 के तहत आनेवाले धाराओं के आधार पर अपराधिक मामलों का अद्ययन करता है और उसका रिकॉर्ड रखता है। एनसीआरबी प्रत्येक वर्ष देश में हुए अपराधों का डेटा रखता है।

गठन: 11 मार्च 1986





आदर्श वाक्य: सूचना प्रौद्योगिकी के साथ भारतीय पुलिस का सशक्तिकरण

मुख्यालय: नई दिल्ली

राष्‍ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो/NCRB) का गठन 11 मार्च 1986 में किया गया था। यह गृह मंत्रालय के साथ संलग्‍न एक कार्यालय है। इसका उद्देश्य भारत की पुलिस के आधुनिकीकरण व सूचना प्रौद्योगिकी में सशक्‍त करना है। यह भारतीय दंड संहिता 1860 के तहत आने वाले धाराओं के आधार पर प्रत्येक वर्ष देश में हुए अपराधिक मामलों का अध्ययन करता है और उसका रिकॉर्ड रखता है। 

यह ब्‍यूरो देश भर में “अपराध अपराधी सूचना प्रणाली” (CCIS) के अंतर्गत प्रत्‍येक राज्‍य अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो एवं जिला अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो में 762 सर्वर-आधारित कम्‍प्‍यूटर सिस्‍टम स्‍थापित कर चुका है, ताकि अपराध, अपराधियों एवं अपराधियों की सम्‍पत्ति से संबंधित राष्‍ट्रीय स्‍तर के डाटा बेस को व्‍यवस्थित किया जा सके। इसके अतिरिक्त यह ब्यूरो “अपराध एवं अपराधी खोज नेटवर्क और प्रणाली” (Crime and Criminal Tracking Network and Systems, CCTNS, सी.सी.टी.एन.एस.) को भी कार्यान्वित कर रहा है, जो भारत सरकार के राष्‍ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के अंतर्गत एक मिशन मोड परियोजना है।

एनसीआरबी पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण भी देता हैं। इन अधिकारियों में अधिकांश भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी होते हैं। आईपीएस के अलावा अन्य क्षेत्रों के अधिकारियों को भी एनसीआरबी प्रशिक्षण देता है। इतना ही नहीं यह विदेशी अधिकारियों को भी अपराधों के प्रति प्रशिक्षण देता है।

उद्देश्‍य

  • पुलिस थानों, जिलों, राज्‍य मुख्‍यालयों एवं संगठनों/संस्‍थाओं तथा भारत सरकार के स्‍तर पर डाटा एकत्रित करने, संचय, पुन: प्राप्ति, विश्लेषण, अन्‍तरण एवं सूचना के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाना।
  • पुलिस बल के बेहतर प्रबंधन के लिए वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारियों का अनुकूलन एवं सहायता।
  • अपराधियों को खोजने और अपराध की तेजी से एवं स‍ही जांच के लिए अधिकारियों को उपकरण, तकनीक एवं सूचना उपलब्‍ध करवाना।
  • पुलिस कार्य प्रणाली के अन्‍य क्षेत्र जैसे कानून एवं व्‍यवस्‍था, यातायात प्रबंधन, संगठित अपराध पर रोक लगाने, संसाधन प्रबंधन आदि में सुधार लाना।
  • अपराध एवं अपराधी जांच तथा अभियोजित मामलों की प्रगति का ब्योरा रखना, जिसमें न्‍यायालयों में मामलों की प्रगति भी शामिल है।
  • सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आई.सी.टी.) के प्रभावी प्रयोग के माध्‍यम से नागरिक-केंद्रित सेवाओं को प्रदान करने में सुधार करना।
  • मैन्‍युल तथा निरर्थक रिकार्ड में कमी लाना।

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