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घूस में सोना! छत्तीसगढ़ के प्रमुख सचिव गिरफ्तार

बीएल-अग्रवाल

रायपुर। रिश्वत देने के आरोप में फंसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख सचिव बी.एल. अग्रवाल को आखिरकार सीबीआई ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। बी.एल. अग्रवाल को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। अग्रवाल 1998 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वहीं सीबीआई की टीम ने अग्रवाल के अलावा उनके साले आनंद अग्रवाल को भी गिरफ्तार किया है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम उन्हेंं अपने साथ दिल्ली ले गई। सीबीआई के डीएसपी केके गौर ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों से दिल्ली में पूछताछ होगी।





गौरतलब है कि उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव बीएल अग्रवाल के खिलाफ सीबीआई ने शनिवार की रात को उनके ठिकानों पर दबिश दी थी। इसके बाद से उनसे लगातार पूछताछ की जा रही थी। रविवार को रिश्वत देने का भांडा फूटने के बाद सीबीआई ने उनके खिलाफ एक और केस दर्ज किया। सीबीआई के अधिकारियों के मुताबिक बीएल उसी केस को खत्म करवाना या राज्य के ईओडब्ल्यू में उसका ट्रांसफर करवाना चाह रहे थे। इसीलिए उनके द्वारा रिश्वत की पेशकश की गई थी। बताया जाता है कि इस केस में उनके साथ दिल्ली का भगवान सिंह और हैदराबाद का बुरहानुद्दीन उर्फ ओपी शर्मा भी फंसे हैं। बुरहानुद्दीन खुद को दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय का अफसर बताता है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई। उसी ने केस को निपटाने की जिम्मेदारी ली थी। पूरी डील भगवान सिंह ने करवायी थी। सीबीआई के सामने रायपुर के हवाला कारोबारी संजय तापडिय़ा का नाम भी आया है। लेकिन अभी तक तापडिय़ा के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया है।

सीबीआई के अनुसार संजय ने रायपुर से बीएल अग्रवाल के पैसे दिल्ली के कांति पुगालिया और अमित के माध्यम से भगवान सिंह को पहुंचाए थे। सीबीआई ने सबसे पहले भगवान सिंह को पकड़ा। उसके बाद 18 फरवरी को सीबीआई के अफसर आनन-फानन में फ्लाइट से रायपुर आए और भिलाई स्थित सीबीआई के अफसरों के साथ शनिवार की रात बीएल अग्रवाल के बंगले में छापा मारा गया। सीबीआई के आधा दर्जन अधिकारी पूरी रात बंगले में दस्तावेजों की छानबीन करते रहे। रविवार शाम तक जांच चल रही थी। सोमवार को सीबीआई के भिलाई दफ्तर में जाकर अग्रवाल ने अपना बयान दर्ज कराया था।

बताया जाता है कि इस मामले में रकम तीन किश्तों में देना तय हुआ था। हालांकि कैश रकम का बंदोबस्त नहीं होने के कारण अग्रवाल द्वारा कैश की जगह दो किलो सोना देना तय किया था। इसके लिए भगवान और बुरहानुद्दीन राजी हो गए। इसके बाद बुरहानुद्दीन और भगवान ने यह सोना रायपुर में ही उनके लिंक को देने को कहा। अग्रवाल ने अपने साले आनंद अग्रवाल को इसकी जिम्मेदारी सौंपी। आनंद 18 फरवरी को दो किलो सोना लेकर उनके लिंक से मिलने वाला था। उसी समय सीबीआई ने एक साथ छापा मारा। सोना बरामद किया गया। बताया जाता है कि आनंद अग्रवाल सदर बाजार के सराफा कारोबारी के पास सोने की जांच करवाने पहुंचा था। इस वजह से वह भी जांच के घेरे में आ गए। इसके बाद सीबीआई ने आनंद अग्रवाल से भी पूछताछ की थी।

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