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PoK में जमीन का सेना दे रही थी किराया, FIR

सीबीआई-मुख्यालय

नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित जमीन के चार हिस्सों के लिए भारतीय सेना ने लाखों रुपए का किराया दिया था। मामले 2000 में प्रकाश में आया था। मामला सामने आने के बाद सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीबीआई के मुताबिक, वर्ष 2000 में उपसंभागीय रक्षा संपदा अधिकारी और नौशेरा के पटवारी ने कई निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर इसकी साजिश रची थी। इससे सरकारी खजाने को लगभग 6 लाख रुपए का नुकसान हुआ है।





सीबीआई ने आरोप लगाया, ‘जिस जमीन का सेना किराया दे रही थी वह जमीन पाकिस्तान के कब्जे में है। साल 1969-70 जमाबंदी रजिस्टर और खसरा नंबर के अनुसार यह जमीन भारत की है ही नहीं बल्कि पीओके में है। इसके बाद भी इसके रक्षा संपदा विभाग उसके कथित मालिक को किराया दे रहा था।’

शुरुआती जांच में पता चला है कि उप-संभागीय रक्षा संपदा अधिकारी आर एच चंदरवंशी, नौशेरा के पटवारी दर्शन कुमार और राजेश कुमार समेत कई लोगों ने मिलकर यह फर्जीवाड़ा किया है। इन्होंने मिलकर पीओके की जमीन को कथित रूप से सेना को किराए पर दी गई जमीन के रूप में दर्शाया।

जांच के मुताबिक, सैन्य अधिकारी, संपदा अधिकारी एवं अन्य अधिकारियों के बोर्ड को जमीन के संबंध में जाली कागजात सौंपे गए थे। बोर्ड इसी वजह से पीओके में स्थित 122 करनाल जमीन के लिए 4.99 लाख रुपये किराए के रूप में देता रहा। इससे सरकारी खजाने को छह लाख रुपये का नुकसान हुआ।

सीबीआई ने प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया है कि इस साजिश में बोर्ड के शीर्ष अधिकारी भी शामिल थे। जांच के दौरान पता चला है कि सेना को नागरिकों से किराए पर जमीन की जरूरत थी। सेना के अधिकारी, रक्षा संपदा और राजस्व विभाग के अधिकारियों वाले बोर्ड ने जमीन का भौतिक सत्यापन कर किराए को मंजूरी दी थी।

सीबीआई के आरोपों के मुताबिक, बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों ने गलत तरीके से यह सत्यापित किया है कि सम्बंधित जमीन सेना ने ली है लेकिन हकीकत यह है कि यह जमीन पीओके में स्थित है।

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