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दुर्लभ और बेशकीमती इस घंटे को ढूँढो, सीबीआई देगी एक लाख रुपये

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (IIAS)

शिमला। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (IIAS) से सात साल पहले चोरी हुए एक दुर्लभ घंटे का सुराग देने वाले को सीबीआई एक लाख रुपये का इनाम देगी। भारी भरकम, दुर्लभ और बेशकीमती इस घंटे को खोजने में हिमाचल प्रदेश की पुलिस पांच साल नाकाम रही और दो साल से सीबीआई भी न घंटे का और न चोरों का पता लगा पाई है। नेपाल के राजा की तरफ से तत्कालीन वायसराय को तोहफे में मिले इस घंटे का पता लगाने में अब सीबीआई ने इनाम घोषित करने का तरीका ढूँढा है।





सीबीआई

एक दुर्लभ घंटे का सुराग देने वाले को सीबीआई ने इस विज्ञापन के जारी एक लाख रुपये का इनाम देने का ऐलान किया है

ये करीब 100 किलो वजनी घंटा आईआईएएस के रिसेप्शन के सामने लगा था और 21 अप्रैल 2010 को जब चोरी हुआ तब इमारत में आठ सुरक्षा गार्ड तैनात थे। चोरी की रिपोर्ट शिमला के बोइलेगंज थाने में दर्ज कराई गई थी। ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व का ये घंटा 1903 में नेपाल के राजा ने वायसराय को दिया था। ब्रिटिश शासक के रात के खाने का आगाज इस घंटे की गूंज से होता था। सबसे हैरानी की बात, जो अब तक समझ नहीं आई, कि इतने कड़े सुरक्षा बंदोबस्त के बावजूद चोर इसे कैसे उड़ा ले गए।

दुर्लभ घंटा

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (IIAS) से सात साल पहले चोरी हुए एक दुर्लभ घंटे का सुराग देने वाले को सीबीआई एक लाख रुपये का इनाम देगी।

घंटे का पता ना लगाए जाने पर IIAS ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ये 2015 की बात है। अदालत में तब इस मामले पर प्रमुख सचिव गृह और प्रदेश के पुलिस प्रमुख तक से जवाब तलबी की थी। बाद में जांच CBI के सुपुर्द कर दी गई।

इमारत का इतिहास

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (IIAS)

यही है इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (IIAS) की इमारत

IIAS को ये इमारत राष्ट्रीय एस राधाकृष्णन ने 1965 में सौंपी थी। हल्के सलेटी रंग के पत्थरों से बनी इस इमारत का निर्माण 1866 से 1888 के बीच हुआ था। 23 जुलाई 1888 को इसमें लार्ड डफरिन और उनकी पत्नी ने रहना शुरू किया। इसके  साथ ही इसे वायसराय लॉज के नाम से पहचान मिली। भारत को आजादी मिलने के बाद इसे राष्ट्रपति निवास कहा जाता था।

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