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क्या आप जानते हैं CBI की 5 खास बातें ?

भारत में जब भी किसी मामले की गुत्थी ज्यादा उलझती नज़र आती है तब उसे सुलझाने का ज़िम्मा भारत सरकार की प्रमुख जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) पर आ जाता है। अपराध चाहे किसी बड़े घोटाले से जुड़ा हो या फिर हालिया बाबा गुरमीत सिंह राम रहीम जैसा हाई प्रोफाइल मामला। सीबीआई जब भी फ्रेम में आती है तो अपराध की सारी कड़ियाँ ताश के पत्तों की तरह एक-एक कर खोल कर रख देती है जैसा कि गुरमीत सिंह के मामले में भी हुआ। सीबीआई के लगाम थामते ही अपराधियो की पसीने छूट जाते हैं और जनता में विश्वास की लहर दौड़ जाती है। आज हम आपको वाकिफ कराते हैं सीबीआई के कुछ ऐसे पहलुओं से जो शायद ही आप जानते हों:





विशेष पुलिस प्रतिष्ठान से हुई उत्पत्ति

सन 1941 में स्थापित किये गए विशेष पुलिस प्रतिष्ठान से ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की उत्पत्ति हुई। उस दौरान दूसरे विश्वयुद्ध में भारतीय युद्ध और आपूर्ति विभाग के लेन-देन में घोटालों की जांच करने का ज़िम्मा विशेष पुलिस प्रतिष्ठान का था। उसके बाद इसी तर्ज पर केंद्र सरकार को कर्मचारियों की घूसखोरी और भ्रष्टाचार पर नज़र रखने की ज़रुरत महसूस हुई और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो रूप लेता चला गया।

01 अप्रैल 1963 को मिला मौजूदा नाम

दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान को मौजूदा नाम “केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो” 01 अप्रैल 1963 को गृह मंत्रालय द्वारा जारी प्रस्ताव के बाद मिला।

आपराधिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की करती है जांच

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो भारतीय सरकार की मुख्य जांच एजेंसी है जो आपराधिक मामलों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अलग-अलग तरह के मामलों की जांच करता है।

भारत में सीबीआई ही है इंटरपोल की आधिकारिक इकाई

सन 1949  में इंटरपोल का हिस्सा बनने के बाद से भारत इंटरपोल (अन्तर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संस्था) के सबसे पुराने सदस्यों में से एक है। सीबीआई को ही भारत में इंटरपोल की अधिकारिक इकाई की ज़िम्मेदारी दी गई है। सीबीआई इंटरपोल के साथ तालमेल में अलग-अलग ऑपरेशन को अंजाम देती है।

695.62 करोड़ रुपए का सालाना बजट

सीबीआई की ज़रूरत और जिम्मेदारियों को समझते हुए उन्हें सरकार की ओर से हर मुमकिन ज़रूरी चीज़ उपलब्ध कराई जाती है। सीबीआई का सालाना बजट 695.62 (वित्त वर्ष: 2017-18) करोड़ रुपए है।

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