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CBI ने अपने ही पूर्व निदेशक के खिलाफ दर्ज की एफआईआर

नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपने ही पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की है। सिन्हा पर कोयला घोटाले की जांच को प्रभावित करने और इसके लिए अभियुक्तों से मुलाकात करने का इल्जाम है।





रंजीत सिन्हा सीबीआई के ऐसे दूसरे निदेशक हैं जिनके खिलाफ इसी एजेंसी ने मामला दर्ज किया है। इससे पहले, सीबीआई के निदेशक रहे एपी सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज हुआ था। उस मामले में मीट निर्यातक मोइन कुरैशी भी अभियुक्त हैं।

सीबीआई ने रंजीत सिन्हा के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13 (2) और 13 (1) (D) के तहत मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने प्रारंभिक जांच में उन्हें आपराधिक दुराचरण और जनसेवक पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार में शामिल होने का दोषी माना है। अगर वह अदालत में उनका दोष साबित करने में कामयाबी होती है तो रंजीत सिन्हा को सात साल कैद की सजा हो सकती है।

दिलचस्प बात ये है कि सीबीआई ने FIR दर्ज करने की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के तीन महीने बाद की जिसमें अदालत ने रंजीत सिन्हा की भूमिका की जांच करने के लिए कहा था। जस्टिस मदन बी लोकुर, कुरियन जोसेफ और एके सीकरी की खंडपीठ ने इस मामले की जांच के लिए, सीबीआई के वर्तमान प्रमुख आलोक वर्मा को, विशेष जांच दल (SIT) का गठन करने के आदेश दिए थे।

रंजीत सिन्हा के दो साल के कार्यकाल 2012-2014 के दौर को सुप्रीम कोर्ट ने ‘पिंजरे में बंद तोते’ की संज्ञा दी थी। कोलगेट के नाम से चर्चित इस घोटाले में सिन्हा की गड़बड़ियां तब सुर्खियों में आई थीं जब आगंतुक डायरी में दर्ज रिकॉर्ड से रंजीत सिन्हा की हाई प्रोफाइल अभियुक्त से मुलाकात का पता चला। ये डायरी उनके सरकारी निवास की है।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने रंजीत सिन्हा के खिलाफ जांच की मांग की थी। रंजीत सिन्हा 1974 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। 64 वर्षीय सिन्हा जमशेदपुर के रहने वाले हैं और बिहार की पटना यूनिवर्सिटी के छात्र रहे हैं।

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